Sunday, 21 June 2009
Friday, 19 June 2009
पिता परमेश्वर पिता है ज्ञानी,पिता विद्वान,पिता विज्ञानी
एक वृक्ष की एक कहानी लादे फल खड़ा अभिमानी,
सुर मुर नदिया सी बहती है ऐसी उसकी जवानी,
लहरों में भी सीधा चलता है,हाथ में दो घूट पानी,
दो सवालो में तय करता अपनी आगे की जिंदगानी,
दो सवालो में रह जाते उसकी आखो का वो पानी ,
दो खंजर से ही वो मरता वरना मौत उसे कहा आनी,
एक पिता की यही कहानी,एक पिता की यही कहानी
नितिन अग्रवाल
एक वृक्ष की एक कहानी लादे फल खड़ा अभिमानी,
सुर मुर नदिया सी बहती है ऐसी उसकी जवानी,
लहरों में भी सीधा चलता है,हाथ में दो घूट पानी,
दो सवालो में तय करता अपनी आगे की जिंदगानी,
दो सवालो में रह जाते उसकी आखो का वो पानी ,
दो खंजर से ही वो मरता वरना मौत उसे कहा आनी,
एक पिता की यही कहानी,एक पिता की यही कहानी
नितिन अग्रवाल
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